लुधियाना ट्रेन में 6 घंटे तक सबके साथ सफर करती रही लाश – देखे वीडियो

जानने के लिए आगे पढ़े…

लुधियाना।  ट्रेन में एक यात्री की मौत के बाद उसका शव पांच प्रमुख स्टेशनों और दो राज्य की सीमाओं को पार कर पंजाब के लुधियाना पहुंचा।  यह लाश छह घंटे तक यात्रियों के बीच घूमती रही और ट्रेन में किसी यात्री के होने का पता नहीं चला।  लुधियाना स्टेशन पर ट्रेन से उतारे जा रहे शव को देखकर ड्यूटी पर मौजूद रेलवे कर्मचारियों ने जीआरपी को सूचना दी।

सूचना मिलते ही जीआरपी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया।  मृतक की पहचान धोडकोट मोगा निवासी 40 वर्षीय रणधीर सिंह के रूप में हुई है।  शव लेकर लुधियाना पहुंचे मृतक के साथी हरगिंदर सिंह और सुखशीर सिंह ने पुलिस को बताया कि तीनों मुंबई से लुधियाना आ रहे थे।

मैं बोरीवली स्टेशन से स्वर्ण मंदिर एक्सप्रेस में बी5 बस में बैठा था। रास्ते में अचानक रणधीर सिंह की तबीयत बिगड़ गई। उसकी हालत बिगड़ती देख उसने पहले ट्रेन के लिए टीटी खोजने की कोशिश की और फिर 139 रेलवे हेल्पलाइन पर संपर्क किया।

रेलवे की मेडिकल टीम ट्रेन के मेरठ स्टेशन पर पहुंचने के तुरंत बाद पहुंच गई।  रेलवे डॉक्टर ने उसके साथी की जांच की और उसे मृत घोषित कर दिया।  उसके बाद शव को उसी ट्रेन से लुधियाना ले गए।

उन्होंने शव को लुधियाना ले जाने के लिए इसी तरह की अनुमति के लिए मेरठ स्टेशन पर आवेदन किया, जहां वह इसे मोगा ले जाएगा।  उसके बाद उसे केबिन में ही लाश ले जाने की इजाजत दी गई। लुधियाना स्टेशन पर लाश को ट्रेन से उतरता देख एसएस सांसद अजय साहनी ने जीआरपी को सूचना दी। सूचना पाकर जीआरपी के डीएसपी बलराम राणा व एसएचओ जसकरण सिंह अपनी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे।

रेलवे के नियमों के अनुसार, जब किसी यात्री की ट्रेन में मृत्यु हो जाती है, तो शव को निकटतम स्टेशन पर छोड़ देना चाहिए। शव को कब्जे में लेने की जिम्मेदारी नजदीकी सीबीपी थाने की है।  पहले शव का पोस्टमार्टम किया जाता है और फिर परिजनों को सौंप दिया जाता है।

उसके बाद एंबुलेंस की मदद से लाश को उसके गंतव्य तक पहुंचाया जाता है। इस मामले में किसी ने शव को अपने कब्जे में नहीं लिया और मेरठ स्टेशन पर कोई पोस्टमार्टम भी नहीं किया गया। कानूनी प्रक्रिया की परेशानी से बचने के लिए शव को ट्रेन में ही छोड़ दिया गया।  यह लाश बिना ताबूत और बिना किसी वायरस प्रोटोकॉल के ट्रेन की सीट पर लुधियाना पहुंची।  यह घोर लापरवाही है।

ऐसे में शव को ट्रेन में ले जाने की इजाजत किसने दी, इसकी जांच की जाएगी। जीआरपी मेरठ से भी जवाब मांगा जाएगा। पोस्टमार्टम के बाद तक शव वारिसों को नहीं सौंपा जाएगा। गस्करन सिंह, एसएचओ, जीआरपी, लुधियाना।

Leave a Reply

Your email address will not be published.