बाप और मामा ने मिलकर अपनी 7 महीने की बच्ची के साथ किया घिनोना काम

जानने के लिए आगे पढ़े…

झडोल : राजस्थान के उदयपुर के कोटरा थाना क्षेत्र में 7 माह के मासूम की हत्या का मामला सामने आया है।निर्दोष गुजरात पुलिस ने अपने हत्यारों को चुना।  पुलिस ने मासूमों को बेचने के आरोप में उसके पिता और चाचा समेत पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।

बताया जाता है कि करीब 3 महीने पहले कोटरा थाना क्षेत्र में कलियोगी के पिता ने अपने साले के साथ मिलकर अपनी मासूम 7 महीने की बच्ची का सौदा किया था। कलयुजी के पिता और चाचा ने बेगुनाहों को बाड़मेर के एक नर्सिंग कर्मचारी विजय ब्राह्मण को डेढ़ रुपये में बेच दिया। 

इतना ही नहीं सब कुछ दबाने के प्रयास में उसने मासूम बच्चे की मां को 50 हजार रुपये भी दिए।  पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराने के लिए। लेकिन आखिरकार मां अपने बेटे से दूर नहीं हो पाई और दो महीने बाद थाने के मुखिया के पास गई और न्याय की मांग की।महासचिव ने पूरे मामले की जांच कटरा थाने को सौंपी।

एसपी के आदेश के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है।  उधर, गुजरात के खदब्रह्मा से पुलिस ने निर्दोष लोगों को गिरफ्तार किया और निर्दोष लोगों को बेचने के आरोप में पीड़िता के पति, भाई और खरीदार समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया। 

पुलिस मामले में आरोपितों से पूछताछ कर रही है।  वही बरी होने के बाद कटरा पुलिस विभाग मासूमियत के लिए बाल कल्याण समिति के कार्यालय में पहुंच गया।  जहां बेगुनाहों को केमिकल वेपन्स कन्वेंशन के हवाले कर दिया गया।  सीडब्ल्यूसी के मासूम सदस्यों ने आवश्यक कदम उठाते हुए मां को सौंप दिया।  तीन महीने बाद बेटे से मिलकर मां का चेहरा खिल उठा।

पुलिस ने युवक को पकड़ लिया।

पुलिस के पास पहुंची तो जांच में सामने आया कि बाड़मेर निवासी विजय शर्मा की कोई संतान नहीं है और वह बच्चे को गोद लेना चाहता है।  वह पीड़िता के भाई से अंबाजी में मिले थे।  जब उसने बच्चे को गोद लेने की इच्छा जताई तो उसके चाचा ने सात महीने की बच्ची को छोड़ने के बदले में डेढ़ लाख रुपये की मांग की, जिसे उसने स्वीकार कर लिया। 

पीड़िता के पहले से ही छह बच्चे थे, इसलिए उसका पति भी उसे बच्चा देने के लिए तैयार हो गया।  फिर अंबाजी नर्सिंगकर्मी से डेढ़ रुपये लेकर सात माह के मासूम को उसके हवाले कर दिया गया।  दो महीने बाद पुलिस इस बच्चे को लेकर आई।

इधर, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ध्रुव कुमार का कहना है कि बच्चा गोद लेने की एक प्रक्रिया होती है।  नर्स ने अपने नीचे से बच्चे को गोद लिया होता तो ठीक रहता, लेकिन जिस तरह से बच्चे को लिया गया वह अपराध की श्रेणी में आता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.