आखिर कौन है ये बाबा जिसके मोदी जी के साथ साथ और भी बहोत बड़ी हस्तीओ के सम्बंद है जानिए पूरी बात

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भारत में संतों, योगियों और शिक्षकों का विशेष स्थान है।  इनकी चमत्कारी कहानियों की चर्चा देश ही नहीं विदेशों में भी होती है।  आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताएंगे, जिसके चमत्कारों की चर्चा खूब होती है।  इतना ही नहीं उनके पास प्रधानमंत्री मोदी से लेकर मार्क जुकरबर्ग तक के समर्थक हैं।जी हां.. हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड के कांची धाम के राजा महाराजा को आशीर्वाद देने वाले संत महात्मा की, जिन्होंने 11 सितंबर 1973 को महा समाधि संभाली थी।

ऐसा माना जाता है कि केवल 17 साल की उम्र में बाबा निम कराली को भगवान का ज्ञान प्राप्त हुआ था।  इतना ही नहीं लोग इसे हनुमान जी का दूसरा रूप मानने लगे।  वहीं बाबा निम कराली भी हनुमान जी के प्रबल समर्थक थे और उन्होंने अपने जीवनकाल में हनुमान जी के लगभग 108 मंदिरों का निर्माण करवाया था।  हालांकि उन्होंने कोई दिखावा नहीं किया और किसी को भी अपने पैर नहीं छूने दिया।अगर किसी को ऐसा करने की आदत है तो उसे हनुमान जी के पैर छूने की सलाह दी जाती है।

वफादार नीम किंग बाबा में फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग, एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स, हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम भी शामिल हैं।  कीची दामा में जब वार्षिक उत्सव का आयोजन होता है तो भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।  इतना ही नहीं खुद प्रधानमंत्री मोदी भी कांची धाम आश्रम पहुंचे हैं।  बाबा नीमा करौली के चमत्कारों के बारे में कई किंवदंतियां जानी जाती हैं।

ऐसा कहा जाता है कि बांदारा के दौरान आश्रम में घी की कमी थी, जिसके बाद बाबा नीमा करुरा या करली के आदेश से पास की एक नदी से पानी लाया जाता था।  जब इस पानी को प्रसाद में इस्तेमाल किया गया तो यह पूरी तरह से घी में बदल गया।  साथ ही कहा जाता है कि भक्त तेज धूप में बाबा के पास आया और बहुत परेशान हुआ।  ऐसे में बाबा ने बादलों से छज्जा बनाकर आश्रम में ले गए।

इतना ही नहीं, बाबा नीमा करुरा के बारे में भी प्रसिद्ध लेखक रिचर्ड अल्बर्ट ने “द मिरेकल ऑफ लव” नामक एक पुस्तक भी लिखी थी, जो बाबा के चमत्कारों के बारे में कई कहानियां बताती है।  लोग उन्हें देवता के रूप में पूजते हैं और उन्हें एक आदर्श मानते हैं।

वहीं, मशहूर हॉलीवुड एक्ट्रेस जूलिया रॉबर्ट्स ने भी 2009 में हिंदू धर्म अपना लिया था।  दरअसल जूलिया एक बार भारत आई और फिर धाम निम राजा बाबा के पास पहुंची।  उसने फैसला किया कि वह भी हिंदू धर्म में परिवर्तित हो जाएगी।  इतना ही नहीं, जूलिया रॉबर्ट्स अभी भी हिंदू धर्म का पालन करती हैं और अक्सर भारत आती रहती हैं।  इसके अलावा फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग ने भी धाम बाबा अस किंग्स का रुख किया।  वहीं प्रधानमंत्री मोदी भी आश्रम गए।

ये भी बता दें, नीम मुल्क बाबा को 20वीं सदी के सबसे महान संतों में से एक माना जाता है।  उनका जन्म उत्तर प्रदेश के विराजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में हुआ था।  बाबा करोली 1961 में नैनीताल पहुंचे, जहां 1964 में उन्होंने भैंस से 7 किलोमीटर दूर कैंशी धाम आश्रम की स्थापना की।  बाबा करोली की न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि विदेशों में भी खूब चर्चा हुई।

बाबा क्राली द्वारा निर्मित मंदिर भारत समेत अमेरिकी टेक्सास में भी मौजूद है।  1960 के दशक में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।  उसके बाद बाबा निम कराली ने समाधि के लिए वृंदावन की भूमि को चुना।  10 सितंबर 1973 को उनकी मृत्यु हो गई। उनकी स्मृति में एक आश्रम और एक मूर्ति भी बनाई गई।

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