अजब गजब: प्राईवेट पार्ट में रंग लगाकर कुंवारों पर छिड़कने से मिलती है ये लड़की

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बाड़मेर में गुरुवार की रात पारंपरिक तरीके से रात 9:20 बजे पुलिस विभाग के सामने होलिका दहन के बाद होली का त्योहार शुरू हो गया। जहां महिलाओं ने गीत गाकर एक दूसरे को बधाई दी और युवा समूहों ने एक दूसरे को जलाल के गीतों से बधाई दी। सुबह-सुबह छोटे-छोटे बच्चे घरों से बाहर निकल आए।

रंग-बिरंगी पिचकारियों से बच्चों ने एक दूसरे को नहलाया।  होलिका दहन के दूसरे दिन ब्राह्मण श्रीमाली समाज की ओर से होली होती है। दूसरे दिन पूरा गांव होली की भूमिका निभाता है।  इस परंपरा के तहत, ब्राह्मण समुदाय की महिलाओं के लिए समाज भवन में इकट्ठा होने और एक-दूसरे के साथ होली खेलने की परंपरा है।

वहीं, महिलाएं विभिन्न देवी-देवताओं के भजन गाती हैं। समुदाय के युवाओं का एक समूह सुबह घर से निकल जाता है और जब वे समुदाय के भाइयों को होली के त्योहार की बधाई दे रहे होते हैं तो वे एक-दूसरे को गुलाल से रंग देते हैं। इसके बाद, कृष्ण एलोजी महाराज के पास जाकर मंत्र का जाप करके घर लौटते हैं जहां वे भक्ति के साथ विभिन्न देवताओं के होली गीत गाते हैं। ऐसा माना जाता है कि एलोजी महाराज के गुप्तांग पर रंग लगाने और कुंवारी कन्याओं पर उसका पानी छिड़कने से विवाह के योग बनते हैं।

शाम पांच बजे महालक्ष्मी मंदिर से मां लक्ष्मी की पूजा करने के बाद ब्राह्मण समाज के लोग संतान प्राप्ति की परंपरा का पालन करते हुए भजनों के साथ होली के गीत गाते हुए सड़क पर उतर जाते हैं।  उसके बाद, महालक्ष्मी मंदिर में पहुंचती हैं जहां देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। 

तत्पश्चात समाज भवन में गोचा गोठ सभा का आयोजन कर सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की जाती है। सदस्यों के अनुसार प्रत्येक घर से खाना पकाने की सामग्री ली जाती है और फिर दाल बाटी के साथ एक ही पंक्ति में बैठकर महालक्ष्मी प्रसाद लिया जाता है। सदियों पुरानी परंपरा को आज भी उसी तरह मनाया जाता है।

वहीं मुख्य बाजार गोर का चौक और आसपास के विभिन्न छोटे-बड़े कस्बों में महिलाओं के गीतों से राजस्थानी संस्कृति की छाया फैलती है। गैर दलों द्वारा विभिन्न प्रकार की प्रस्तुतियाँ दी जाती हैं। इसके अलावा, विभिन्न प्रकार की प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाता है। इस तरह आप आपसी भाईचारे का संदेश देखते हैं।

उन्होंने विश्व प्रसिद्ध लाखेता गैर खंडप शीतला सप्तमी सहित कई प्रदर्शनियां शुरू कीं।  दूसरे दिन से नगरवासी व ग्रामीण द्वारा डीजे की धुन पर होली खेली जाती है।  डीजे की थाप पर नाचने-गाने वाले एक-दूसरे को लोन जोलाल लगाते हैं।

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