इस गांव के कबूतरों का रेट करोड़ो रुपये है, लोगो से ज्यादा आमिर है ये कबूतर , जानिए पूरी बात

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राजस्थान में प्रतापगढ़ का एक अनूठा शहर भी है जहां कबूतर करोड़पति हैं।  प्रतापगढ़ के बम्बोरी छोटीसदरी तहसील के गांव में खेती, दुकान और बैंक बैलेंस से इसकी देखभाल करने वाले ग्रामीण हैं।

कबूतरों के लिए अनाज लेने के लिए लगभग 12 भूमि पेगासस और विशेष भोजन भी हैं।  समुदाय हर साल लगभग 1 लाख रुपये कमाता है। 

इस पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए आयोग ने एक बैंक खाता भी खोला।  साथ ही डेढ़ लाख रुपये की एफडी भी की गई है। कबूतर दो बोरी मकई दिन में दो बार खाते हैं।  ग्रामीणों का मानना ​​है कि उनके पूर्वजों ने 400 साल पहले इस परंपरा की शुरुआत की थी, जो आज भी जारी है।

प्रतापगढ़:  आपने किसी व्यक्ति, कंपनी या कंपनी के करोड़पति होने के बारे में तो बहुत सुना होगा, लेकिन आपने पहली बार सुना होगा कि कोई जानवर या पक्षी करोड़पति होता है। 

प्रतापगढ़ की छोटासदरी तहसील के बम्बोरी गांव के हम्माम को अगर लखपति हम्माम कहा जाए, तो कोई गलती नहीं होगी, क्योंकि इस गांव के हम्माम में अनाज के पानी के साथ-साथ कृषि, दुकान, बैंक बैलेंस और देखने वालों की भरमार है। उनके बाद ग्रामीण हैं। 

गांव के आसमान में हजारों की संख्या में कबूतर सुबह-शाम गांव में घूमते देखे जा सकते हैं।  उनकी सेवा के लिए प्रतिबद्ध ग्रामीण भी चक्कर लगाने के साथ-साथ सक्रिय हो जाते हैं और फिर अपने भोजन की व्यवस्था करना शुरू कर देते हैं।

ये कबूतर इस कबूतर की तरह नहीं हैं।  उनके पास रुपये का बैंक बैलेंस है, साथ ही लगभग 12 पेगासस जमीन और अनाज इकट्ठा करने के लिए उनके कबूतर का चारा है।  इतना ही नहीं, इसके भंडार मक्के की गुठली से भरे पड़े हैं, जिनका सेवन साल भर किया जा सकता है। 

यह कबूतर दिन में दो बार दो बोरी मकई खाता है।  शहर के बुजुर्गों और सेवानिवृत्त लोगों ने यह जिम्मेदारी इसलिए ली ताकि कबूतरों को चारा खिलाने में कोई बाधा न आए।

ग्रामीणों का कहना है कि 400 साल पहले उनके पूर्वजों ने इसकी शुरुआत की थी। इसके बाद लोग जुड़ने लगे। लोगों ने बम्बूरी में कबूतरों को खिलाने की व्यवस्था करने के लिए एक आयोग का गठन किया।अब इसी कमेटी के पास बाथरूम की सारी फिक्सिंग है।

समिति इन कबूतरों के चारे के पानी के निपटान के लिए उनके बैग को पूरे शहर में वितरित करने के लिए आगे बढ़ती है।इस मामले में ग्रामीण भी अपना पूरा सहयोग देते हैं।

इतना ही नहीं पानी में कबूतरों के लिए गोलियों की भी कमी नहीं है, इसलिए ग्रामीणों ने अपने स्तर पर करीब 12 पेगासी जमीन दान में दी।व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह जमीन हर साल आयोग द्वारा किराए पर दी जाती है। 

इसके परिणामस्वरूप, समाज हर साल लगभग 1 रुपये कमाता है। इस पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए आयोग ने बैंक में खाता भी खोला। साथ ही डेढ़ लाख रुपये की एफडी भी हासिल की है।

साथ में युवा

साथ ही युवा अपने पूर्वजों और बड़ों द्वारा शुरू की गई इस परंपरा को कायम रखने से भी दूर नहीं हैं।  इस व्यवस्था को निरंतर बनाए रखने के लिए गांव और गांव के बाहर रहने वाले युवा अपने स्तर पर सहयोग करते रहते हैं। 

युवाओं का कहना है कि वे आने वाले दिनों में इस परंपरा को बनाए रखने की पूरी कोशिश करेंगे।

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